इंडिया ओपन में अव्यवस्था पर खेल मंत्रालय का सख्त रुख
खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने साई से मांगा सुधार का खाका
खेलपथ संवाद
नई दिल्ली। इंडिया ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट के दौरान सामने आई गंभीर अव्यवस्थाओं को लेकर खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सोमवार को भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए ठोस सुधार के उपाय लागू करने के निर्देश दिए। खेल मंत्रालय इस पूरे मामले को भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि से जोड़कर देख रहा है।
खेल मंत्री ने उन स्टेडियम प्रशासकों के साथ भी बैठक की जो टूर्नामेंट के दौरान मौके पर मौजूद नहीं थे। उनसे पिछले सप्ताह टूर्नामेंट में फैली अव्यवस्था को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया। यह मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए भारत की दावेदारी के लिहाज से यह साल बेहद अहम है और इस तरह की चूक से देश की छवि को नुकसान पहुंच सकता है।
टूर्नामेंट के दौरान कई ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिन पर साइ को जवाब देना पड़ सकता है। हालांकि, दिल्ली की खराब वायु गुणवत्ता पर नियंत्रण साइ के हाथ में नहीं है, लेकिन मैचों के दौरान कबूतरों का कोर्ट पर बीट करना, दर्शक दीर्घा में बंदरों की मौजूदगी, वॉशरूम और अभ्यास स्थलों में साफ-सफाई की कमी जैसी शिकायतों ने आयोजकों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। एक सूत्र ने कहा, 'खेल मंत्री ने इन सभी मुद्दों पर गंभीरता से संज्ञान लिया है और साइ अगले कुछ दिनों में सुधारात्मक कदमों का विस्तृत ब्योरा देगा।'
स्टेडियम के रखरखाव की जिम्मेदारी साइ की होने के कारण संस्था की जमकर आलोचना हो रही है, खासतौर पर इसलिए क्योंकि अगस्त में इसी स्थान पर बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप का आयोजन होना है। डेनमार्क की खिलाड़ी मिया ब्लिचफेल्ट ने हालात को अस्वास्थ्यकर बताते हुए विश्व बैडमिंटन महासंघ (बीडब्ल्यूएफ) से हस्तक्षेप की मांग तक कर दी थी।
देश में खेल बुनियादी ढांचे के रखरखाव और राष्ट्रीय शिविरों के संचालन की जिम्मेदारी भी साइ पर ही है। हालांकि, भारतीय बैडमिंटन संघ को टूर्नामेंट से कुछ ही हफ्ते पहले स्टेडियम सौंपा गया था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की शिकायतों के बाद उसे मीडिया आलोचना का सामना करना पड़ा।
एक अन्य सूत्र ने बताया कि हालात पर नियंत्रण के लिए उप निदेशक स्तर के किसी वरिष्ठ अधिकारी की मौके पर मौजूदगी जरूरी थी, जैसा कि पिछले साल जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में पैरा विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के दौरान किया गया था, जहां आयोजन सफल रहा था।
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) ने सदस्य देशों से फीडबैक के आधार पर अपने मानदंडों की समीक्षा के लिए ओलंपिक मेजबान चयन प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक रखा है। हालांकि, उम्मीद है कि यह प्रक्रिया इसी साल फिर शुरू होगी। भारत को इस दौड़ में कतर जैसी मजबूत दावेदारी का सामना करना है, जिसने विभिन्न खेलों में अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की सफल मेजबानी कर अपनी क्षमता साबित की है।
सूत्रों का कहना है कि ओलंपिक मेजबानी के लिए अहमदाबाद प्रमुख दावेदार शहरों में शामिल है, लेकिन इंडिया ओपन जैसी घटनाएं भारत की नकारात्मक छवि बना सकती हैं। सूत्र ने कहा, 'इस तरह की बातें आईओसी तक पहुंचती हैं और मतदान पर असर डाल सकती हैं। सुधार के उपाय न सिर्फ आत्मविश्वास बहाल करने के लिए जरूरी हैं, बल्कि यह दिखाने के लिए भी अहम हैं कि भारत 2036 ओलंपिक की मेजबानी को लेकर पूरी तरह गंभीर है।'
