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विश्व की सबसे युवा कम्पाउंड तीरंदाज ने साझा किए अनुभव
खेलपथ संवाद
जयपुर। खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स जैसे आयोजन खिलाड़ियों को बड़े प्लेटफॉर्म का अनुभव देते हैं। इस स्तर की प्रतियोगिता में खेलना हमेशा प्रेरणादायक रहता है। ये प्रतियोगिताएं खिलाड़ियों को बड़े मंच के लिए तैयार करती हैं। यह कहना है विश्व तीरंदाजी चैम्पियनशिप में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाली अदिति गोपीचंद स्वामी का।
पहली बार खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में पार्टिसिपेट करने वाली अदिति ने शिवाजी विश्वविद्यालय की ओर से खेलते हुए स्वर्ण पदक जीता था। जयपुर के जगतपुरा स्थित शूटिंग रेंज में हुए फाइनल मुकाबले में अदिति ने महिलाओं के कंपाउंड व्यक्तिगत वर्ग में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की तनिपर्थी चिकिथा को 147-143 से मात दी थी।
वर्ष 2023 में बर्लिन में आयोजित विश्व तीरंदाजी चैम्पियनशिप में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने वाली अदिति ने पहली बार खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में हिस्सा लिया और शिवाजी विश्वविद्यालय की ओर से खेलते हुए स्वर्ण पदक जीता था। इससे पहले वे खेलो इंडिया यूथ गेम्स (2022, 2023, 2024) में भी तीन स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुकी हैं। खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स आयोजन समिति ने उन्हें भारत की पहली और विश्व की सबसे युवा कम्पाउंड तीरंदाज बताया।
अपना एक्सपीरियंस शेयर करते हुए अदिति ने कहा कि ये आयोजन खिलाड़ियों को बड़े प्लेटफॉर्म का अनुभव देते हैं। इस स्तर की प्रतियोगिता में खेलना हमेशा प्रेरणादायक रहता है। ये प्रतियोगिताएं खिलाड़ियों को बड़े मंच के लिए तैयार करती हैं। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया यूथ गेम्स और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स जैसे आयोजन खिलाड़ियों के प्रोफेशनल डेवलपमेंटल और इकोनामिक स्ट्रैंथ के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होते हैं। चूंकि कंपाउंड तीरंदाजी पहली बार मिक्स्ड टीम इवेंट के रूप में ओलम्पिक में शामिल की जा रही है, ऐसे में अदिति अब 2028 लॉस एंजिलिस ओलम्पिक को अपना अगला लक्ष्य बना चुकी हैं। उन्होंने कहा कि पहले कंपाउंड के ओलम्पिक में शामिल न होने का मलाल रहता था, लेकिन अब उनके पास देश के लिए स्वर्ण जीतने का बड़ा अवसर है।
इस दौरान उन्होंने आर्थिक चुनौतियों पर बात करते हुए बताया कि टॉप्स (टारगेट ओलम्पिक पोडियम स्कीम) से जुड़ने से पहले प्रशिक्षण, आहार और जिम जैसी जरूरतों पर काफी खर्च होता था। ऐसे में खेलो इंडिया छात्रवृत्ति ने उनके सफर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही अदिति ने कहा कि लगातार बढ़ते स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर और गवर्नमेंट सपोर्ट ने खिलाड़ियों के लिए नए अवसर खोले हैं और उन्हें उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में भारत अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी में और मजबूत उपस्थिति दर्ज करेगा।