बीच मैच में से 11 साल के शतरंज खिलाड़ी को बाहर करना 'भावनात्मक खिलवाड़'

चेन्नई, 21 अक्टूबर | शतरंज टूर्नामेंट के बीच में से 11 साल के बच्चों को हटाना एक भावनात्मक खिलवाड़ और बच्चे का शोषण है जो उसकी मानसिकता पर गहर प्रभाव छोड़ सकता है। ऐसा सिर्फ उस बच्चे के साथ नहीं, बल्कि इस वाकये को देख रहे बाकी बच्चों पर भी इसका गलत प्रभाव पड़ सकता है। तमिलनाडु में त्रिरुनेवेली जिला शतरंज विकास संघ (टीडीसीटीए) के एक अधिकारी ने स्थानीय टूर्नामेंट में 11 साल के कार्तिक राहुल को बीच टूर्नामेंट में से बाहर कर दिया।

शतरंज खिलाड़ियों ने अखिल भारतीय शतरंज महासंघ (एआईसीएफ) से इस मामले कि जिम्मेदारी लेने की मांग की, क्योंकि उससे संबंध रखने वाली संस्था ने ऐसा किया है। उन्होंने साथ ही कहा है कि राजनीतिक एजेंडा के कारण इस बच्चे पर गलत प्रभाव पड़ सकता है। अर्जुन अवार्ड विजेता दिब्येंदु बारुआ ने आईएएनएस से कहा, "इस तरह का हादसा बच्चे के लिए जीवनभर का सदमा बन सकता है।"

मनोवैज्ञानिक चित्रा अरविंद ने आईएएनएस से कहा, "बच्चे को खेलते समय बीच में से उठाना भावनात्मक शोषण है। इससे बच्चों पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है साथ ही उन बच्चों पर भी जो इस वाकये को देख रहे थे। 11 साल की उम्र में बच्चा युवाअवस्था में प्रवेश करता है। इसी उम्र में बच्चे अपनी क्षमता को विकसित करते हैं।" यहां एक दिन के अंडर-10/13/15 बालक एवं बालिका वर्ग में शतरंज टूर्नामेंट में यह वाकया हुआ।

बच्चे के पिता के.मुरुगेश बाबू ने आईएएनएस से कहा, "मैंने अपने टूर्नामेंट की एंट्री फीस भरी थी और अपने बच्चे को टूर्नामेंट के स्थल पर छोड़कर चला गया था। मुझे पता चला कि जब वह पहला राउंड खेल रहा था, जब बी.पाउलकुमार जो टीडीसीडीए के सचिव हैं, ने यह कहते हुए मेरे बच्चे को बाहर कर दिया कि उसने उस टूर्नामेंट में हिस्सा लिया है जो एआईसीएफ/तमिलनाडु शतरंज संघ और जिला संघ से मान्यता प्राप्त नहीं था।" बाबू के मुताबिक, अधिकारी ने उनके बेटे से लिखित में माफीनामा लिखने को कहा और साथ ही कहा कि वह आगे से गैरमान्यता प्राप्त टूर्नामेंट में नहीं खेलेगा।

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